लेखकः गुलाम शब्बर (जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया, क़ुम, ईरान)
हौज़ा न्यूज़ एजेंसी ! कभी-कभी इतिहास में ऐसे क्षण आते हैं जब समय स्वयं ठहरकर किसी दृश्य को देखता है, पीढ़ियाँ मौन होकर किसी घटना की साक्षी बनती हैं और दुनिया स्वीकार करती है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि इतिहास का एक निर्णायक मोड़ है। हमारे शहीद सुप्रीम लीडर की अंतिम यात्रा भी ऐसा ही एक क्षण थी।
कल रात उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया, लेकिन उससे पहले एक सप्ताह ऐसा बीता जिसने पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया। शहर-शहर लाखों, बल्कि करोड़ों लोग अपने प्रिय सुप्रीम लीडर को अंतिम सलाम पेश करने के लिए निकल पड़े। तेहरान की सड़कें लोगों के सैलाब में बदल गईं, क़ुम की गलियाँ आँसुओं से भीग गईं, मशहद का वातावरण शोक से भर गया और नजफ़ व कर्बला की पवित्र धरती ने भी इस दुख को अपनी गोद में समेट लिया। दुनिया के विभिन्न देशों से आए लोगों ने यह सिद्ध कर दिया कि यह व्यक्तित्व केवल किसी एक देश, एक राष्ट्र या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था; वे पूरी उम्मत के दिल की धड़कन बन चुके थे।
यह दृश्य केवल प्रेम की अभिव्यक्ति नहीं था, बल्कि एक मौन घोषणा भी थी—ऐसी घोषणा जिसकी गूँज अत्याचारियों के महलों तक पहुँच रही थी। जिन्होंने यह समझा था कि एक बम विस्फोट किसी पूरी कौम को चुप करा देगा, उन्होंने अपनी आँखों से देख लिया कि शहादत ने वह कर दिखाया जो शायद वर्षों के प्रचार से भी संभव न हो पाता।
जब वे जीवित थे, तब बहुत से लोग उन्हें केवल एक सुप्रीम लीडर के रूप में जानते थे, लेकिन जब वे हमसे बिछड़ गए तो लोगों के दिलों में उनकी महानता का ऐसा स्थान बना जिसे समय कभी मिटा नहीं सकेगा। यही दुनिया का स्वभाव है कि किसी नेमत का मूल्य अक्सर उसके छिन जाने के बाद समझ में आता है। शहादत ने उनकी महानता को छिपाया नहीं, बल्कि और अधिक उजागर कर दिया। जो लोग उन्हें नहीं जानते थे, वे उन्हें जानने लगे। जो उनसे दूर थे, वे उनके निकट आ गए। जो मौन थे, वे उनके समर्थन में बोल उठे। यहाँ तक कि जिन लोगों के उनसे मतभेद थे, उनमें से भी बहुत सो ने सम्मान के साथ उनके व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि अर्पित की।
हत्यारे ने सोचा था कि वह एक दीपक बुझा देगा, लेकिन अनजाने में उसने लाखों दीप जला दिए।
उसने समझा था कि एक आवाज़ हमेशा के लिए शांत हो जाएगी, लेकिन वही आवाज़ अब लाखों लोगों की ज़ुबान से गूँजने लगी।
उसने यह कल्पना की थी कि केवल एक सुप्रीम लीडर का जनाज़ा उठेगा, लेकिन वास्तव में उसके अपने सपनों का जनाज़ा उठ गया।
यह अंतिम यात्रा केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं थी, बल्कि अत्याचारी के अहंकार की कब्र थी। इस जनाज़े के साथ उठने वाला हर कदम अन्याय के महलों पर गूँजती हुई चोट था। हर आँख से गिरने वाला आँसू हत्यारे के चेहरे पर एक करारा तमाचा था। हर नारा इस सत्य की घोषणा कर रहा था कि शहीद का रक्त कभी व्यर्थ नहीं जाता।
सदियों में कभी-कभार ऐसे जनाज़े उठते हैं जो केवल किसी एक व्यक्ति को कब्र तक नहीं पहुँचाते, बल्कि पूरी उम्मत की चेतना को जागृत कर देते हैं। ऐसे जनाज़े इतिहास के पन्नों पर ही नहीं लिखे जाते, बल्कि राष्ट्रों के दिलों में अंकित हो जाते हैं। वे समय के साथ पुराने नहीं पड़ते, बल्कि हर नई पीढ़ी को एक नया संदेश देते रहते हैं।
आज दुनिया ने अपनी आँखों से देख लिया कि प्रेम की हत्या नहीं की जा सकती, निष्ठा को बमों से समाप्त नहीं किया जा सकता और एक सच्चे रहबर का अपनी कौम से संबंध केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं होता। कुछ संबंध मृत्यु के बाद आरंभ होते हैं, कुछ प्रेम बिछड़ने के बाद और गहरे हो जाते हैं और कुछ रहबर अपनी शहादत के बाद अपनी कौम के दिलों में हमेशा के लिए जीवित हो जाते हैं।
हमारे शहीद आज सुप्रीम लीडर भले ही मिट्टी की गोद में विश्राम कर रहे हों, लेकिन उनका जनाज़ा अपने पीछे एक संकल्प छोड़ गया है—सत्य पर अडिग रहने का संकल्प, अत्याचार के सामने कभी न झुकने का संकल्प, उम्मत की प्रतिष्ठा और सम्मान की रक्षा का संकल्प तथा उस ध्वज को कभी झुकने न देने का संकल्प जिसे उन्होंने अपने पूरे जीवन और अपने रक्त से ऊँचा रखा।
यह जनाज़ा समाप्त हो गया, लेकिन इसका संदेश अभी शुरू हुआ है।
यह दफ़न पूरा हो गया, लेकिन इसके साथ ही हमारे कंधों पर एक नई ज़िम्मेदारी आ गई है।
अब हमारी निष्ठा का प्रमाण केवल आँसू नहीं, बल्कि दृढ़ता है; केवल भावनाएँ नहीं, बल्कि कर्म हैं। और प्रेम का सच्चा प्रमाण यही है कि हम उस मार्ग पर अटल बने रहें जिस पर हमारे शहीद रहबर अपनी अंतिम साँस तक डटे रहे।
हे अल्लाह! हमारे शहीद सुप्रीम लीडर के इस महान बलिदान को मुस्लिम उम्मत की जागृति, पीड़ितों की शक्ति और अत्याचारियों के अपमान का माध्यम बना। उनकी कब्र को अपने प्रकाश से भर दे, उन्हें अपने प्रिय बंदों में उच्च स्थान प्रदान कर और हमें यह सामर्थ्य दे कि हम उनके रक्त से किए गए इस संकल्प को कभी न भूलें। हे पालनहार! इस उम्मत को सदैव ऐसे ही निष्ठावान, साहसी और दूरदर्शी रहबर प्रदान करता रहे और हमें उनके पदचिह्नों पर दृढ़ता के साथ चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन, ऐ सारे संसार के पालनहार।
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